ब्रह्म मुहूर्त का समय और महत्व (Brahma Muhurta Ka Samay)

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Brahma Muhurta
Brahma Muhurta

ब्रह्म मुहूर्त क्या होता है और ब्रह्म मुहूर्त का समय (What is Brahma Muhurta And brahma muhurta ka samay) : हिन्दु शास्त्र के अनुसार एक दिन में कुल 30 मुहूर्त होते हैं और इन मुहूर्त में से सबसे शुभ मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त (brahma muhurta) होता है. इन 30  मुहूर्त में से 15 मुहूर्त रात के समय होते हैं जबिक 15  मुहूर्त  दिन के समय होते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि आखिर 30 मुहूर्त में से ब्रह्म मुहूर्त का समय (brahma muhurta ka samay) ही सबसे उत्तम क्यों माना गया है और क्यों इस मुहूर्त के दौरान ही पूजा करने को कहा जाता है. आज हम आपको हिन्दु धर्म के 30 ब्रह्म मुहूर्त के नाम और ब्रह्म मुहूर्त क्यों खास होता है ये बताने जा रहे हैं.

30 मुहूर्त के नाम (30 Muhurta ke naam) –

मुहूर्त का नाम समय प्रारंभ समय समाप्त
रुद्र     06.00 6.48
आहि   6.48 07.36
मित्र    07.36 08.24
पितृ 08.24 09.12
वसु    09.12 10.00
वराह 10.00 10.48
विश्‍वेदेवा 10.48 11.36
विधि   11.36 12.24
सप्तमुखी 12.24 13.12
पुरुहूत  13.12 14.00
वाहिनी 14.00 14.48
नक्तनकरा      14.48 15.36
वरुण 15.36 16:24
अर्यमा  16:24 17:12
भग 17:12 18:00
गिरीश 18:00 18:48
अजपाद 18:48 19:36
अहिर बुध्न्य    19:36 20:24
पुष्य 20:24 21:12
अश्विनी 21:12 22:00
यम 22:00 22:48
अग्नि   22:48 23:36
विधातॄ  23:36 24:24
कण्ड 24:24 01:12
अदिति 01:12 02:00
जीव/अमृत 02:00 02:48
विष्णु 02:48 03:36
युमिगद्युति 03:36 04:24
ब्रह्म 04:24 05:12
समुद्रम 05:12 06:00

 

किसे कहते हैं ‘ब्रह्म मुहूर्त?

ये मुहूर्त सुबह के समय शुरू होता है और इस मुहूर्त के शुरू होने का समय सुबह का 4.24 का होता है. जो कि 5.12 तक चलता है. इस मुहूर्त के दौरान सूर्य उदय होने लगता है. ऐसा माना जाता है कि दिन के सभी मुहूर्तों में से ये मुहूर्त ही सबसे उत्तम होता है और इस मुहूर्त के दौरान किया गया कार्य हमेशा सफल होता है. क्योंकि ये मुहूर्त भगवान से जुड़ा हुआ होता है. मान्यताओं के अनुसार इस मुहूर्त के समय भागवान की शक्तियों का प्रभाव काफी अधिक होता है. ब्रह्म मुहूर्त में ब्रह्म शब्द परम तत्व या परमात्मा से जुड़ा हुआ होता है।

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ब्रह्म मुहूर्त का महत्व (Brahma muhurta ka mahatva)

पूजा करें

ऐसा कहा जाता है कि ब्रह्म मुहूर्त के दौरान की गई पूजा का लाभ अधिक मिलता है. इसलिए पूजा करने के लिए इस मुहूर्त को ही सबसे सही माना जाता है. इस मुहूर्त के दौरान भगवान की शक्तियां जागृत होती हैं और उनका प्रभाव अधिक होता है.

शुभ कार्य करें

कई लोग तो ब्रह्म मुहूर्त के दौरान ही शुभ कार्य की शुरुआत किया करते हैं. क्योंकि इस मुहूर्त के दौरान किए गए शुभ कार्य का फल सदा उत्तम ही होती है.

दिमाग तेज होता है

जो लोग ब्रह्म मुहूर्त के दौरान उठते हैं उनका दिमाग दुरुस्त बना रहता है और तेजी से कार्य किया करता है. ब्रह्म मुहूर्त को के दौरान पढ़ी गई चीजें भी ज्यादा देर तक याद रहती हैं। इसलिए बच्चों को इस मुहूर्त के समय उठकर पढ़ने को कहा जाता है.

ब्रह्म मुहूर्त के दौरान ना करें ये काम

ब्रह्म मुहूर्त के दौरान किसी यात्रा के लिए घर से निकलना या फिर मन में नकारात्मक विचार लाना उत्तम नहीं माना जाता है. इसलिए आप इस ब्रह्म मुहूर्त के दौरान अपना मन शांत ही बनाए रखें और कोध बिलकुल भी ना करें.

ये थी ब्रह्म मुहूर्त के महत्व से जुड़ी जानकारी (Brahma muhurta ka mahatva). अब जानते हैं ब्रह्म मुहूर्त का समय (brahma muhurta ka samay)

ब्रह्म मुहूर्त का समय (brahma muhurta ka samay) –

जैसा की हमने आपको बताया की रोज सुबह के समय ब्रह्म मुहूर्त शुरू होता है और इस दौरान पूजा करने फलदाय़क होता है। हर रोज प्रातःकाल 4.24 बजे से ब्रह्म मुहूर्त का आगमन होता है जो कि 5.12 तक रहता है। शुभ कार्य करने के लिए ब्रह्म मुहूर्त का समय (brahma muhurta ka samay) ही चुनें।

ब्रह्म मुहूर्त में कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए?

ब्रह्म मुहूर्त के समय आप अपने ईष्ट देव से जुड़े मंत्रों का जाप कर सकते हैं. अपने ईष्ट देव के मंत्रों को ब्रह्म मुहूर्त के दौरान जपना गुणकारी होता है।

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